भूतिया बगीचा की कहानी: एक बगीचा जहाँ रात्रि में पुराने मालिक की आत्मा घूमती है और लोगों को परेशान करती है।

कहीं एक छोटे से गांव में एक भूतिया बगीचा था। इस बगीचे की कहानी गांववालों के बीच में फैली हुई थी। बगीचे की सुंदरीता के बावजूद, लोग रात्रि में वहाँ जाने से डरते थे। कहा जाता था कि बगीचे में रात्रि में पुराने मालिक की आत्मा घूमती थी और वह लोगों को परेशान करती थी।

गांव के एक छोटे से लड़के का नाम अर्जुन था। उसने सच्चाई जानने का निश्चय किया। एक रात, जब सब सो गए थे, अर्जुन बगीचे की ओर बढ़ा। उसने अपनी हिम्मत बंधाई और बगीचे की ओर बढ़ते हुए देखा कि कोई भूतिया नहीं था।

अर्जुन ने बगीचे की खोज में जुट जाते हुए देखा कि वह सचमुच मर चुके मालिक की आत्मा नहीं, बल्कि कुछ चोर थे जो बगीचे में छुपे आभूषणों को चुरा रहे थे। अर्जुन ने जल्दी पुलिस को संदेश भेजा और चोरों को पकड़वाया।

जब लोगों को पता चला कि बगीचे में भूतिया आत्मा की बजाय चोर थे, तो वह सब बहुत ही चौंके थे। इस घटना ने गांववालों को यह सिखने का मौका दिया कि किसी की बातों में विश्वास नहीं करना चाहिए और खुद की जाँच-पड़ताल करनी चाहिए। इसके बाद से बगीचा पुनः सुरक्षित हो गया और लोग बिना डर के वहाँ जा सकते थे।

भूतिया बगीचा की कहानी: एक बगीचा जहाँ रात्रि में पुराने मालिक की आत्मा घूमती है और लोगों को परेशान करती है।
भूतिया बगीचा की कहानी: एक बगीचा जहाँ रात्रि में पुराने मालिक की आत्मा घूमती है और लोगों को परेशान करती है।

भूतिया बगीचा की कहानी

Haunted garden story in Hindi

कहानी का पहला पृष्ठ:

एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक भूतिया बगीचा था। इस बगीचे का नाम सुनते ही लोग डर के मारे दूर रहते थे। बगीचे के अंदर अनेक प्रकार के पेड़-पौधों की महक फैली हुई थी, लेकिन कोई भी वहाँ जाने के लिए तैयार नहीं था। एक दिन, गांव का एक बहादुर लड़का नामक अर्जुन उस बगीचे की ओर बढ़ा।

अर्जुन, होशियार और निर्भीक था। वह बगीचे की रहस्यमयी दुनिया की खोज में निकला। जब वह बगीचे के अंदर पहुंचा, तो उसने देखा कि वहाँ अच्छाई की महक फैली हुई थी। उसने अपनी उत्सुकता को नियंत्रित करते हुए और विश्वास बनाए रखते हुए बगीचे की गहराईयों में खुद को डाल दिया।

कहानी का दूसरा पृष्ठ:

अर्जुन को बगीचे के अंदर की अनोखी खूबसूरती और शांति का अनुभव हुआ। उसने देखा कि वहाँ पेड़-पौधों के बीच में खुशबू से भरी हवा बह रही थी। वहाँ के फूलों की महक और पक्षियों की मधुर चहचहाहट ने उसे भटकने नहीं दी। अर्जुन को लगा कि यह भूतिया बगीचा उसे अपनी शांति और सुख-संपत्ति से नवाज रहा है।

धीरे-धीरे, अर्जुन ने बगीचे में समय बिताना शुरू किया। वह हर रोज़ नए चमत्कार देखता, नई खुशबू महसूस करता, और बगीचे के रहस्यमयी वातावरण में गहरा समाहित होता जा रहा था।

कहानी का तीसरा पृष्ठ:

एक दिन, अर्जुन ने बगीचे के मध्य में एक पुरानी किताब ढूंढी। उस किताब में लिखा था कि इस बगीचे में एक पुराना जादुई वृक्ष है जो किसी की भी इच्छा पूरी कर सकता है। अर्जुन ने उस वृक्ष की खोज में निकल पड़ा।

बगीचे के अंदर घूमते हुए, अर्जुन ने वह जादुई वृक्ष पाया। वह वृक्ष बहुत ऊँचा था, और उसकी शाखाओं पर अनेक प्रकार के फल लगे हुए थे। अर्जुन ने अपनी इच्छा मन में रखी और वृक्ष से एक फल मांगा।

जैसे ही अर्जुन ने वह फल छूआ, उसकी इच्छा पूरी हो गई। वह हर सुख-संपत्ति से भर गया। इसके बाद, अर्जुन ने वह जादुई वृक्ष बगीचे में सुरक्षित रखने का संकल्प किया और लौट कर अपने गांव की ओर बढ़ा।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि भय को पार करने और अपनी मंजिल की प्राप्ति के लिए हमें निरंतर प्रयत्नशील रहना चाहिए। जब हमारी निष्ठा, संकल्प और संघर्षशीलता मजबूत होती है, तो हम किसी भी भूतिया स्थिति से निकल कर अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं।

भूतिया बगीचा की कहानी में

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